मप्र के दौरे से शिक्षाकर्मियों के नेता की नसीहत :क्या छग नहीं बन सकता दूसरे राज्यों के लिए आदर्श?

रायपुर .शिक्षाकर्मी नेता वीरेंद्र दुबे ने सरकार पर तंज कसा है और कहा है कि जिस प्रदेश में नीति ही नहीं बन पाई है, वहां अधिकारी भला क्या देखेंगे. उन्होंने कहा कि क्या छत्तीसगढ़ दूसरे राज्यों के लिए आदर्श नहीं बन सकता?. यहाँ से शिक्षाकर्मियों का   दल जायेगा मध्यप्रदेश अपने  संविलियन की मांग को लेकर.शिक्षाकर्मी नेता वीरेंद्र दुबे ने कहा कि मध्यप्रदेश में अब तक केवल मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संविलियन की घोषणा की है, जिसे अब तक वहां के प्रशासनिक अधिकारी अमलीजामा नहीं पहना सके हैं. जबकि राजस्थान, दिल्ली जैसे राज्यों ने इस पर बेहतर काम कर इस समस्या का स्थायी समाधान ढूंढ लिया है. उन्होंने कहा कि कमेटी पिछले माह राजस्थान का दौरा करके आ चुकी है, जिसके कारण 1 मई को संपादित हुए बैठक को लेकर शिक्षाकर्मियों में जबरदस्त उत्साह देखा गया था, लेकिन मुख्य सचिव द्वारा मप्र दौरे की बात कहने से वो आक्रोश में बदल गया. हाईपॉवर कमेटी का लगातार कार्यकाल बढ़ाने को लेकर सरकार आलोचनाओं से घिरी हुई है. सरकार को शिक्षाकर्मियों के आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है.

वीरेंद्र दुबे ने सवाल किया कि क्या हमारे प्रशासनिक अधिकारी अन्य राज्यों के लिए आदर्श स्थापित नहीं कर सकते..? आखिर हमें क्यों अलग-बगल झांकने की जरूरत पड़ रही है..? उन्होंने कहा कि इस टालमटोल रवैए को छोड़ना होगा और जल्द ही समस्त शिक्षाकर्मियों का संविलियन करना होगा, नहीं तो शिक्षाकर्मियों में असंतोष और आक्रोश बढ़ता जाएगा. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि शासन के पास अभी भी मौका है कि वो 11 मई के पहले तक संविलियन की घोषणा कर दे, नहीं तो छत्तीसगढ़ के 1 लाख 80 हजार शिक्षाकर्मी 11 मई को राजधानी कूच करेंगे.

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