ग्रामीण 8 गुना ज्यादा हैं खुशहाल शहरियों से

कनाडा के मांट्रियल स्थित मैकगिल यूनिवर्सिटी और वैंकूवर स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन किया है।  शहर में रहने वालों के पास सुख-सुविधाओं का अंबार हो सकता है, मगर वह खुशहाल नहीं हैं।इसके लिए कनाडा के विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले तकरीबन चार लाख लोगों पर सर्वे किया गया। शोधकर्ताओं का कहना है कि शहर में रहने वालों के पास ऊंची सैलरी और शिक्षा हो सकती है। शहरों में बेरोजगारी दर भी कम हो सकती है, मगर वह ग्रामीण या छोटे शहरों में रहने वाले लोगों के मुकाबले आठ गुना कम खुश रहते हैं।  शोधकर्ताओं का कहना है कि इसकी कई वजहें हो सकती है, मगर सबसे अहम वजह लोगों में मजबूत सामाजिक आधार न होना है। पूर्व में हुए अध्ययनों में कहा गया है कि शहर में रहने वाले लोगों का अपने परिवार और मित्रों से ज्यादा संपर्क नहीं रहता है। इस हफ्ते हुए इस शोध से पता चलता है कि सामाजिक अलगाव से दिमाग में बदलाव होने लगते हैं। दिमाग में एक ऐसे केमिकल का स्राव होने लगता है, जो डर और आक्रामकता को बढ़ावा देता है।

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